आइये हम इस घड़ी में वो पर्वत-शिखर बनें जिसकी जरूरत इस दुनिया को है- मुग्धा

ये अंधियारा और रोगग्रस्त समय है. ऐसा समय जबकि सच कल्पना (Imagination) से भी ज्यादा अजनबी है. हकीकत किसी बुरे सपने से भी ज्यादा डरावनी है और बाकी सभी सच भी धुंधले हैं. कल्पना से कोसों दूर हैं.

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